" हिंदी कविता, ग़ज़ल, कहानी, का संगम। शब्दों के माध्यम से प्रेम, भावनाओं और कल्पनाओं की दुनिया में आपका स्वागत है।"
इलायची - लघु कहानी
"इलायची"
―माँ फ़िर से बिरयानी में आपने इलायची डाल दिये?
माँ―मुझे नहीं आती तुम्हारी वो इश्क़ वाली बिरयानी बनाना ,बता क्यों नहीं देते
अपने दिल की बात उसे।
―माँ आपको कैसे पता वो इलायची नहीं डालती बिरयानी में !
माँ―जब मैं तेरा टिफ़िन साफ करती हूँ तो उसमें,इलायची की महक नहीं आती,औऱ तू
बता दे उसे कहीं वो किसी औऱ के चाय में न घुल जाए !
(धीरे से हँसते हुए माँ कहती
है)
तो लगता है धोखा है!! - Women Day Special
तो लगता है , सब धोखा है!!
साड़ी में जब किसी लड़की को देखता हूँ,
तो लगता है धोखा है!!
वो बदन ढकने को नहीं,
ज़माने के नग्न विचारों को ढकती है, पर्दा करती है ।
हिरे-ज़ेवरात जो नुमाइश के लिए रखे जाते है
दूकानों में,उन्हें खुद पे नाज होता
है ,
की उनके ख़ूबसूरती को ढंका नहीं जाता ,
उनके आजदी पे बोलने वाला कोई समाज नहीं
होता।
औऱ जब शिशे में क़ैद,कोई नग्न लड़की का पुतला देखता हूँ,
तो लगता है धोखा है!!
कश्मीर की कली - नज़्म
कश्मीर की कली
हसरतें अभी कुछ नहीं ,
नींद से भौचंक उठा ,
सपनों में एक वाक़या हुआ ,
उस दिन काले बुर्के में ,
ग़ुलाब वाले हाथ,
दो लाल चूड़ियां पहने ,
पत्थर चुन रहीं थी।
मेरे जवानो के लहू
बहाने को।
कैसे मान लूँ ?
कश्मीर नायब हैं !
खूबसूरत है !!
घटी के मोहतरमा ,
आप इश्क़ करना सिख लो ,
हम बेवफ़ाई का दर्द झेल लेंगे ,
अब पत्थर का दर्द चुभता है।
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