कथाकार: शेर-शायरी

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पलायन -कविता




पलायन - 






  कुछ दिनों में

  हम सब ये मान लेंगे।
  समय से ज़्यादा,चलायमान होता है
  ग़रीब आदमी का पाँव।




































शायरी - डाकिया



तुम ये न समझना हम तुमसे ख़फ़ा बैठे है
चिट्ठियां  लिख डाली है डाकिया घर बैठे है। 




दंगा - शेर-शायरी


Copyright :कुंदन चौधरी 


फ़ोटो साभार : Google 

पुलवामा अटैक- शायरी



पुलवामा अटैक में शाहदत को प्राप्त हुए सभी वीरों को " इनफिनिट वर्ड " के और से भावपूर्ण श्रद्धांजलि !!
दिलासा मायने नहीं रखते जब ऐसे हमले होते हैं। 
हमें सबक सिखाना होगा उन कायरों को जो ,
अपने कायराना हरकतों से बाज नहीं आ रहे 
उनके जड़ों को ख़त्म करने का समय आ गया है। 



हयात-ए-इश्क़



और फ़िर मोहब्बत वाला दिन ढल गया ,
हयात - ए - इश्क़ दिल से निकल गया। 





इश्क़ और ख्वाब


जो सेतु बनाया है , इश्क़ में तेरे ,
चलके कभी आना , तू ख्वाब में मेरे। 





इश्क़ और सूली


सूली पर लटकना चाहता है ,
दिल शायद इश्क़ करना चाहता है।  




मेट्रो और इश्क़



मेट्रो और इश्क़ 









तन्हाई और इश्क़


इश्क़ औऱ मेरा किरदार 





मज़हबी इश्क़ -II


मैं और तुम्हारा मज़हबी इश्क़





तलब -ए -इश्क़


तुम्हारी तलब और मै बर्बाद 


वादियां-ए -इश्क़



वादियां-ए -इश्क़ 






सर्जिकल स्ट्राइक स्पेशल

लहूलुहान है मेरा इश्क़ 


 

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