कथाकार

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उम्र छोटी है, ये जान लो (Title By Vivek Jha , Written by Kundan)

फ़ादर्स डे स्पेशल

Shayri-15

ख़ता ऐसा करूँ इश्क़ में, की मेरे जाने के बाद
सज़दे में, वो रोज नदामत  करे ..
नदामत=ग्लानि, पछतावा

Shayri-14

उम्र भर का तराशा ज़ब्त-ए-शराफत ,
किसी महरूम के हाथों का तमाशा बन गया,

Shayri-13

सच है क्या ?मुस्कुराने लगा हूँ ,तन्हा में मैं?!!
या मेरे आईने खुशमिजाज हो गए!!

Shayri-12

उलूल-जुलूल हरक़तें ,सब याद आई ख़ल्वत में।
कभी जीते थे बेपरवाह ज़िंदगी,अब जीते है उल्फ़त में।

Shayri-11

किस रात की क़यामत हो तुम,
ऐसा चाँद कहाँ से आया आसमाँ में,...

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