कथाकार

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मेला-नज़्म


  
फ़ोटो :कुन्दन चौधरी
स्थान :हरिद्वार 

तुम्हें मालूम है !


 "तुम्हें मालूम है "




माँ



रसूख़ , इश्क़ और कोई यार नहीं होता ,
माँ से बिछड़ने के बाद , कोई दुलार नहीं होता।  








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